उज्जैन। गर्मी की दस्तक के साथ ही शहर में पेयजल की मांग बढने लगी है। इसे देखते हुए आरओ पानी वितरकों के दामों में भी अचानक बढ़ोतरी हो गई है। इस दाम वृद्धि से आम जन हलाकान है। आर ओ पानी के दाम बराबर बढाए जा रहे,शहर की सीमा से लगे क्षेत्रों में घर पहुंच सेवा में 50 रू.टैंक तक वसूली हो रही है। वहीं सेल्फ में 25-30 की वसूली एवं सामान्य शहरी क्षेत्र की कालोनी में घर पहुंच सेवा में 35-45 तक वसूल रहे हैं।गर्मी बढने के साथ ही ठंडे पानी की मांग बराबर बढना शुरू हो जाती है। इसके लिए आरओ पानी की मांग के साथ दाम भी बराबर बढ रहे हैं। पिछले एक साल में ही दामों में दुसरी बार बढोतरी की स्थिति सामने आ रही है। इसके तहत एक साल में 20 लीटर पानी की केन पर सेल्फ में 10 एवं घर पहुंच सेवा में करीब 20 रूपए की बढोतरी होना सामने आ रहा है। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आशीष बैरागी बताते हैं कि घर पहुंच सेवा में 25-35 रूपए तक तो ठीक है उससे ज्यादा की वसूली नाजायज और बेईमानी ही कही जाएगी। सेल्फ में अधिकतम 20-25 रूपए काफी हैं।अधिकांश घरों में आरओ पानी की मांग-शहरी क्षेत्र में हाल यह हैं कि गर्मी बढने के साथ ही हर दुसरे घर में आर ओ पानी की मांग बन रही है।कुछ ही समय पहले तक 20 लीटर की पानी की कैन 20 रुपए में आसानी से मिल रही थी। ठंडे एवं शुद्धता के मान को देखते हुए इसकी मांग बराबर बन रही है। नलों से आने वाले पानी को लेकर आमजन वैसे ही शंकित होने के कारण भी यह मांग बराबर बनी हुई है। हालत यह है कि कालोनी क्षेत्रों में तो हर दुसरे घर में आर ओ पानी के केन लेकर वाहन पहुंचते देखे जा सकते हैं।मांग के साथ दाम बढ रहे मांग को देखते हुए बराबर इसके दाम में बढोतरी हो रही है। सबसे खास तो यह है कि फायदे के लिए कायदे ताक पर रख दिए गए हैं ,मनमर्जी की वसूली की जा रही है,जबकि प्लांटों का संचालन में भी नियमों का पालन सही से नहीं हो रहा है। शहरी क्षेत्र में संचालित प्लांट में पीएचई का ही पानी स्टोरेज कर ठंडा कर वितरित किया जा रहा है और पीएचई को नाम मात्र का पैसा मिल रहा है। इसके अलावा प्लांट वाले बमुश्किल सालों में पीएचई से पानी की जांच ही करवा रहे हैं।एक साल पहले तक 15-20 रूपए में मिलने वाली 20 लीटर पानी की केन अब 25-35 रुपए तक पहुंच गई है। घर तक डिलीवरी लेने पर लोगों से 35 से 45 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। शहरी सीमा के क्षेत्रों में वितरण पर यह स्थिति 50 रूपए तक जा रही है। गर्मी आते ही लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए पानी के प्लांट संचालको ने केन ‘टंकी’ के भाव बढ़ा दिए है। जबकि, लागत में कोई इजाफा नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि गर्मी शुरु होते ही आरो प्लांट संचालक रेट बढ़ा देते हैं। सर्दियों में कम कीमत पर मिलने वाला पानी अचानक महंगा हो जाता है। कहीं न कहीं पानी के नाम पर चल रहीमुनाफाखोरी को भी नियंत्रित करने की जरुरत है।लागत कम, वसूली ज्यादा-जानकारों के अनुसार 20 लीटर आरओ केन पानी तैयार करने की लागत बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसी स्थिति में पुरानी दर 15-20 रूपए दर पर्याप्त है । घर पहुंच सेवा के लिए इसमें परिवहन की दर के मान से बढाया जा सकता है लेकिन वर्तमान में जिस मान से केन की वसूली की जा रही है वह कदापि सही नहीं कही जा सकती है। आर ओ वाटर प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष बैरागी खूद इसे स्वीकार करते हैं। वे कहते हैं कि घर पहुंच सेवा में 25-35 रूपए परिवहन शुल्क के साथ अधिकतम राशि है। वैसे 30 रूपए वाजिब दाम है। सेल्फ में तो यह 20 रूपए काफी है। शहरी क्षेत्र के बाहर केन ले जाने पर भाडा आवश्यक होता है । भरी केन ले जाना और खाली केन लाने का भाडा ही करीब 2 हजार के लगभग होता है। इस स्थिति में दर करीब 35-40 रूपए प्रति केन के मान से बैठ जाती है। जो परिवार रोजाना 1-2 कैन पानी पर निर्भर हैं, उनके लिए यह बढ़ोतरी सीधे खर्च बढ़ाने वाली है। एक महीने में यह खर्च सैकड़ों रुपए तक पहुंच जाता है। आरओ वाटर की लागत कच्चा पानी व बिजली खर्च दो रुपए, फिल्टर-मेंटेनेंस एक रुपए, कैन उपयोग, धुलाई व लेबर तीन रुपए। सब मिलाकर केन की लागत सात से 10 रुपए पड़ती है। जबकि, 30 से 45 रुपए तक की वसूली शुरु कर दी गई है।
धडल्ले से खुल रहे प्लांट-
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री बैरागी बताते हैं कि अब तो धडल्ले से प्लांट खोले जा रहे हैं। पानी का पर्याप्त स्त्रोत हो न हो प्लांट चल रहा है। उनके अनुसार प्लांट में टीडीएस मशीन से पानी का स्तर पता चल जाता है। नल का पानी 300 टीडीएस तक उपयोगार्थ होता है। इसमें तो अधिकतम 200 टीडीएस भी नहीं होता । सैंकडा की स्थिति भी बहुत ही कम सामने आती है। ऐसे में जांच करवाने की बहुत ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है।
5 साल से एसोसिएशन भंग-
श्री बैरागी बताते हैं कि कोरोन काल से पूर्व सत्र 2018-19 के दौरान उन्होंने संस्था से अपना त्याग पत्र दे दिया था। उसके बाद से संस्था भंग पडी हुई है। तत्कालीन समय में ही 40-45 सदस्य थे अब तो शहर में 400-500 के लगभग आर ओ प्लांट हो गए हैं। इसके साथ ही क्वाईन बाक्स भी चल रहे हैं।